आटे से बनी 64 देवियों की प्रतिमाओं के पूजन की परंपरा, शाम 6:32 से रात 8:51 बजे तक रहेगा श्रेष्ठ मुहूर्त; सिंह राशि में त्रिग्रही प्रभाव के बीच जानें ग्रहों की स्थिति और दिनभर का फलकथन

सनातन धर्म और भारतीय पंचांग परंपरा में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को 'पिठोरी अमावस्या' या 'कुशग्रहणी अमावस्या' के रूप में श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व विशेष रूप से मातृशक्ति द्वारा अपनी संतानों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, संकट निवारण और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए समर्पित है। इस दिन महिलाएं निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखकर पिठोरी माता के रूप में 64 योगिनियों (देवियों) की विधिवत आराधना करती हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और समूचे मध्य भारत में यह लोकपर्व अत्यंत आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है।

पिठोरी माता का पूजन विधान और शुभ समय: शाम को 64 देवियों की होगी महापूजा

पिठोरी अमावस्या पर आटे (पिष्ट) से 64 देवियों की प्रतीक आकृतियां बनाकर उनकी स्थापना व पूजन करने का विशेष धार्मिक विधान है। मान्यता है कि इस दिन की गई साधना से बालारिष्ट दोष समाप्त होते हैं और संतानों के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6:32 बजे से रात्रि 8:51 बजे तक (कुल अवधि: 2 घंटे 19 मिनट)।

परंपरा और विधि: महिलाएं गेहूं अथवा चावल के आटे से 64 योगिनियों की प्रतीक पिंडियां या प्रतिमाएं बनाती हैं। इसके पश्चात उन्हें धूप-दीप, गंध, ताजे पुष्प, अक्षत और ऋतुफल अर्पित किए जाते हैं।

विशेष नैवेद्य: माता को घर में बने विभिन्न प्रकार के मिष्ठान और पकवानों का भोग लगाकर संतानों के कल्याण और कुल की वंश वृद्धि की मंगल प्रार्थना की जाती है।

10 सितंबर 2026 का संपूर्ण पंचांग

  • तिथि: कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (सुबह लगभग 10:33 बजे तक), तत्पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ
  • वार: गुरुवार
  • नक्षत्र: मघा (दोपहर लगभग 2:04 बजे तक), इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
  • योग: सिद्ध योग (शाम लगभग 7:17 बजे तक), इसके उपरांत साध्य योग
  • सूर्य एवं चंद्र राशि: सूर्य देव एवं चंद्र देव दोनों ही सिंह राशि में संचरण करेंगे
  • सूर्योदय एवं सूर्यास्त: सूर्योदय सुबह 6:03 बजे, सूर्यास्त शाम 6:32 बजे

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:31 से 5:17 बजे
  • प्रातः संध्या: सुबह 4:54 से 6:03 बजे
  • अमृत काल: सुबह 11:47 से दोपहर 1:19 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:42 बजे
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:12 बजे
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:20 से 6:44 बजे
  • सायाह्न संध्या: शाम 6:32 से 7:40 बजे
  • निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 11:55 से अगले दिन 12:41 बजे तक

अशुभ समय एवं वर्जित काल

  • राहुकाल: दोपहर 1:51 से 3:25 बजे तक (इस दौरान नवीन व शुभ कार्य वर्जित हैं)
  • गुलिक काल: सुबह 9:10 से 10:44 बजे तक
  • यमगण्ड: सुबह 6:03 से 7:37 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: सुबह 10:13 से 11:03 बजे एवं दोपहर 3:12 से 4:02 बजे तक
  • वर्ज्य काल: रात 9:48 से 11:21 बजे तक
  • गण्ड मूल: सुबह से दोपहर 2:04 बजे तक (मघा नक्षत्र की उपस्थिति के कारण)

10 सितंबर 2026: सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल

मेष: पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वातावरण रहेगा। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां प्राप्त हो सकती हैं। व्यापारिक वर्ग के लिए लाभ के नए स्रोत विकसित होंगे।

वृषभ: आजीविका के साधनों में प्रगति होगी। भूमि, भवन या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों में मधुरता एवं स्थिरता आएगी।

मिथुन: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। करियर में मनवांछित सफलता की संभावना है। व्यापार विस्तार के नए सौदे हाथ लगेंगे तथा प्रेम संबंधों में परस्पर संवाद प्रगाढ़ होगा।

कर्क: सामाजिक प्रतिष्ठा और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय से आर्थिक लाभ संभव है। महत्वपूर्ण निर्णयों में परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का पूर्ण मार्गदर्शन मिलेगा।

सिंह: राशि में सूर्य-चंद्र की उपस्थिति से प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में नए लाभदायक अनुबंध निष्पादित हो सकते हैं। नौकरी में कार्यभार के साथ-साथ पदोन्नति व आर्थिक उन्नति के योग हैं।

कन्या: कार्यक्षेत्र में योजनाबद्ध प्रयासों का सुखद परिणाम मिलेगा। कारोबारी स्तर पर कोई महत्वपूर्ण व्यावसायिक सौदा तय हो सकता है। आय और व्यय में संतुलन बना रहेगा।

तुला: स्वराशि के शुक्र के प्रभाव से व्यापारिक दृष्टि से बड़ा अवसर सामने आएगा। पुराने निवेश या रुके हुए धन की प्राप्ति होगी। दांपत्य जीवन व प्रेम संबंधों में सामंजस्य बढ़ेगा।

वृश्चिक: पदोन्नति एवं वेतन वृद्धि के संकेत हैं। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यावसायिक साझेदारियों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी।

धनु: कार्यक्षेत्र में विस्तार की योजनाएं मूर्त रूप लेंगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और आकस्मिक लाभ संभव है। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।

मकर: आजीविका में नए उत्तरदायित्व मिल सकते हैं। नए उद्यम अथवा स्टार्टअप की शुरुआत के लिए अनुकूल समय है। वित्तीय मामलों में स्थिरता बनी रहेगी।

कुंभ: रियल एस्टेट और व्यापारिक लेन-देन में उल्लेखनीय लाभ होगा। करियर को एक नई सकारात्मक दिशा मिलेगी तथा आकस्मिक धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।

मीन: नौकरी एवं व्यापार में नवाचार के अवसर मिलेंगे। कलात्मक, बौद्धिक और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

पिठोरी अमावस्या का यह पावन अवसर मातृत्व के त्याग, पारिवारिक अनुशासन और सनातन नक्षत्र गणना का एक अत्यंत सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। शुभ मुहूर्तों का समुचित उपयोग करते हुए की गई देव आराधना और पितृ तर्पण न केवल व्यक्ति के आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि ग्रह-गोचर के सकारात्मक प्रभावों को भी जीवन में गतिशीलता प्रदान करते हैं।