गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मनाया जीत का जश्न, काम पर लौटे; 3 दिन तक चले गतिरोध में हमीदिया अस्पताल की सेवाएं रहीं बुरी तरह प्रभावित, 1,391 मरीज बिना इलाज लौटे और 20 सर्जरी हुईं स्थगित

राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से संबद्ध इंटर्न डॉक्टरों का बीते तीन दिनों से चल रहा उग्र आंदोलन बुधवार को शासन के साथ सफल वार्ता के बाद समाप्त हो गया। उप-मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) के प्रतिनिधियों की करीब एक घंटे चली मैराथन बैठक में स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि पर सहमति बन गई। शासन ने इंटर्न चिकित्सकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने की मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के उपयोग को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है तथा पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की है। सहमति बनने के बाद डॉक्टरों ने कमला पार्क पर चल रहा धरना खत्म कर दिया और काम पर लौटने की विधिवत घोषणा की।

50% स्टाइपेंड वृद्धि और पुलिसकर्मियों पर गाज: उच्चस्तरीय बैठक के प्रमुख निर्णय

कमला पार्क पर चल रहे तीन दिवसीय धरने के बाद मंत्रालय स्तर पर हुई बैठक में शासन ने चिकित्सकों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया। वार्ता सफल होते ही डॉक्टरों ने सड़कों पर नारेबाजी कर जश्न मनाया और यातायात को सुचारु कराया।

  • स्टाइपेंड बढ़कर हुआ ₹21,500: इंटर्न डॉक्टरों की आर्थिक विसंगति को दूर करते हुए मासिक भत्ते में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे अब उन्हें प्रति माह ₹21,500 का मानदेय प्राप्त होगा।
  • दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच: सोमवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर वाटर कैनन और बल प्रयोग के मामले में प्राथमिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है।
  • जांच कमेटी और घायल छात्रों का उपचार: लाठीचार्ज की घटना की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया है। साथ ही, पुलिस कार्रवाई में चोटिल हुए सभी छात्र-छात्राओं के समुचित व निःशुल्क इलाज की जिम्मेदारी शासन ने ली है।
  • सद्भावपूर्ण वातावरण में गतिरोध समाप्त: बैठक में जूडा और एमटीए की मौजूदगी में शासन ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य और गरिमा की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है, जिसके बाद डॉक्टरों ने आंदोलन पूरी तरह वापस ले लिया।

हमीदिया अस्पताल में चरमराईं सेवाएं: 1,391 मरीज बिना इलाज लौटे, 20 ऑपरेशन टले

तीन दिनों तक चले इस कार्यबहिष्कार का सीधा और व्यापक असर मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान हमीदिया अस्पताल पर पड़ा। सीनियर डॉक्टरों की सीमित मौजूदगी के चलते सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।

  • ओपीडी में भारी गिरावट: सामान्य दिनों में हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 3,000 मरीजों का पंजीकरण होता है, किंतु बुधवार को केवल 1,609 पर्चे ही बन सके। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक परामर्श के बाद ओपीडी बंद हो गई, जिससे 1,391 मरीजों को बिना डॉक्टर को दिखाए मायूस होकर लौटना पड़ा।
  • दूरदराज के जिलों से पहुंचे मरीज हलकान: भोपाल के अलावा सीधी, राजगढ़ और इंदौर जैसे सुदूर क्षेत्रों से बस और ट्रेनों के जरिए पहुंचे गरीब व ग्रामीण मरीज दिनभर पर्चा लेकर भटकते रहे और अंततः बिना उपचार के वापस लौटने को मजबूर हुए।
  • 20 सर्जरी स्थगित: ऑपरेशन थियेटर (OT) में भी हड़ताल का सीधा असर देखा गया। सामान्यतः होने वाली करीब 40 सर्जरियों के मुकाबले बुधवार दोपहर तक केवल 20 जरूरी ऑपरेशन ही हो सके, जबकि 20 निर्धारित ऑपरेशनों को टालना पड़ा। हालांकि, आपातकालीन (Emergency) और आईसीयू सेवाएं निरंतर चालू रखी गईं।
  • ट्रैफिक डायवर्जन से शहरवासी परेशान: कमला पार्क क्षेत्र में डॉक्टरों के सड़क पर बैठने के कारण ट्रैफिक को वन-वे करना पड़ा, जिससे पुराने और नए भोपाल को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही।

स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इंटर्न चिकित्सकों के इस गतिरोध का समय रहते समाधान निकलना समूचे प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी राहत है। मासिक स्टाइपेंड में 50 फीसदी की बढ़ोतरी युवा डॉक्टरों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, वहीं लाठीचार्ज मामले में पुलिसकर्मियों पर त्वरित कार्रवाई ने छात्रों के विश्वास को बहाल किया है। चिकित्सकों की तत्काल कार्य पर वापसी से हमीदिया सहित प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में चरमराई ओपीडी, जांच और सर्जरी व्यवस्थाएं एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ सामान्य हो सकेंगी।

गृह विभाग ने दिए प्रशासनिक जांच के आदेश; गृह सचिव शिल्पा गुप्ता को जिम्मा, 7 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के इंटर्न डॉक्टरों द्वारा स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन और बल प्रयोग किए जाने के मामले को राज्य सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच कराने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। गृह विभाग की सचिव शिल्पा गुप्ता (IAS) को इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और समग्र जांच का जिम्मा सौंपा गया है। गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जांच अधिकारी को संपूर्ण घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पड़ताल कर एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सीधे राज्य शासन को प्रस्तुत करनी होगी।