सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संस्तुति और केंद्र की मंजूरी के बाद संभाली कमान; भोपाल में जुटे न्यायिक जगत और शासन-प्रशासन के शीर्ष गणमान्य

मध्य प्रदेश की न्यायपालिका के इतिहास में 10 सितंबर 2026 को एक नया अध्याय जुड़ गया है। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे (Justice Alpesh Yashwant Kogje) ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में विधिवत पदभार संभाल लिया है। राजधानी भोपाल स्थित राजभवन के 'सांदीपनि सभागार' में आयोजित गरिमामयी एवं भव्य समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के उपरांत केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुपालन में यह नियुक्ति की गई है। इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में राज्य शासन, न्यायपालिका और विधि जगत की शीर्ष हस्तियों ने सहभागिता की।

राजभवन में गरिमामयी आयोजन: गुजरात हाईकोर्ट के 20 न्यायाधीशों की विशिष्ट उपस्थिति

शपथ ग्रहण समारोह की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद मुख्य सचिव ने भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति अधिपत्र (वारंट ऑफ अपॉइंटमेंट) को पढ़कर सुनाया। तत्पश्चात राज्यपाल ने जस्टिस कोगजे को संविधान के प्रति निष्ठा और निष्पक्ष न्यायदान की शपथ दिलाई।

  • गुजरात न्यायिक बिरादरी की गरिमामयी मौजूदगी: इस समारोह की सबसे प्रमुख विशेषता गुजरात उच्च न्यायालय से आए करीब 20 वरिष्ठ न्यायाधीशों की उपस्थिति रही। अपने पूर्व सहयोगी के मुख्य न्यायाधीश पद पर आसीन होने के गौरवशाली क्षण का साक्षी बनने के लिए गुजरात न्यायपालिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से भोपाल पहुंचा।
  • शीर्ष प्रशासनिक व राजनीतिक हस्तियों का जमावड़ा: समारोह में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता (Advocate General), वरिष्ठ अधिवक्ता, पुलिस महानिदेशक (DGP), मुख्य सचिव और राज्य मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों सहित कई विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
  • पारंपरिक शुचिता और गरिमा: विधि-विधान और निर्धारित प्रोटोकॉल के साथ संपन्न हुए इस कार्यक्रम के उपरांत राज्यपाल और उपस्थित अतिथियों ने जस्टिस कोगजे को पुष्पगुच्छ भेंट कर नवीन दायित्व के लिए बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

न्यायिक यात्रा और अनुभव: गुजरात से मध्य प्रदेश तक का सफर

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे देश के उन प्रतिष्ठित न्यायविदों में गिने जाते हैं, जिनका बार और बेंच दोनों में ही सुदीर्घ और बेदाग अनुभव रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर उनकी पदोन्नति न्यायिक प्रशासनिक दक्षता और विधिक समझ का स्वाभाविक सम्मान है।

  • वकालत से बेंच तक का सफर: गुजरात उच्च न्यायालय में एक सफल अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद जस्टिस कोगजे को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।
  • संवैधानिक व आपराधिक विधियों के विशेषज्ञ: गुजरात हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई युगांतरकारी और जटिल संवैधानिक, दीवानी व आपराधिक मामलों में ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
  • कॉलेजियम की पारदर्शी अनुशंसा: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी वरिष्ठता, योग्यता और प्रशासनिक क्षमता का सूक्ष्म मूल्यांकन करने के पश्चात मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए उनके नाम की संस्तुति की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकृति प्रदान की।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष प्राथमिकताएं और कार्ययोजना

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस कोगजे के समक्ष राज्य की प्रमुख न्यायिक पीठ जबलपुर सहित इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के सुचारु संचालन और न्यायिक सुधारों को गति देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

  • लंबित मुकदमों का त्वरित निस्तारण: प्रदेश की विभिन्न अदालतों और हाईकोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों की संख्या को नियंत्रित करने और मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष लोक अदालतों व स्पेशल बेंचों के गठन को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
  • न्यायिक प्रणाली का डिजिटलाइजेशन: आधुनिक तकनीक, वर्चुअल हियरिंग (ई-कोर्ट), पेपरलेस फाइलिंग और एआई-सक्षम न्यायिक प्रक्रियाओं के विस्तार पर जोर दिया जाएगा, जिससे सुदूर ग्रामीण अंचलों के वादकारियों को भी सुलभ न्याय मिल सके।
  • अधीनस्थ न्यायपालिका का सुदृढ़ीकरण: जिला एवं तहसील स्तर के न्यायालयों में बुनियादी ढांचे का विकास, न्यायिक अधिकारियों की रिक्तियों को भरना और बार-बेंच के बीच मधुर व समन्वित संबंध स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करना राज्य की न्याय व्यवस्था को नई ऊर्जा, विधिक स्पष्टता और प्रशासनिक गतिशीलता प्रदान करेगा। निष्पक्ष और त्वरित न्याय की संवैधानिक प्रतिबद्धता के साथ उनका विशाल न्यायिक अनुभव प्रदेश के आम नागरिकों, वंचित वर्गों और वादकारियों के अधिकारों के संरक्षण में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगा।