प्रदेश में सामान्य से 7% पीछे चल रहा मानसूनी कोटा, जून से अगस्त तक 14% कम बरसा पानी; भोपाल में सितंबर की बारिश ने पिछले 5 साल के तोड़े रिकॉर्ड, IMD ने जारी किया ताजा बुलेटिन
मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय रहे मानसूनी तंत्र की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बने स्ट्रॉन्ग वेदर सिस्टम के कमजोर पड़ने के चलते आसमान से घने मानसूनी बादल छंट गए हैं और बुधवार से अधिकांश जिलों में तेज धूप खिलने से वातावरण में उमस बढ़ गई है। मौसम केंद्र (IMD), भोपाल के अनुसार, राज्य में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश के आसार बेहद कम हैं और मानसून 'ब्रेक' की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि, स्थानीय नमी और वातावरण के दबाव के चलते कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जारी रह सकती है। शुक्रवार से पूर्वी मध्य प्रदेश के चुनिंदा जिलों में भारी बारिश की नई शुरुआत होगी, जबकि 13 सितंबर से एक सशक्त मानसूनी तंत्र सक्रिय होने के बाद पश्चिमी हिस्से समेत समूचे प्रदेश में मूसलाधार बारिश का नया दौर लौटेगा।
मौसम विभाग का तीन दिवसीय पूर्वानुमान: शुक्रवार को 4 जिलों में अलर्ट, 13 सितंबर से नई शुरुआत
वर्तमान में मध्य प्रदेश के ऊपर कोई सक्रिय मानसूनी चक्रवात या वेदर सिस्टम प्रभावी न होने के कारण बारिश का दायरा सिमट गया है। आईएमडी ने गुरुवार को पूरे प्रदेश में भारी बारिश की किसी भी चेतावनी से इनकार किया है, किंतु सप्ताहांत से मौसमी गतिविधियों में तेजी आएगी।
- गुरुवार को शुष्क रहेगा मौसम: प्रदेश के किसी भी जिले में भारी वर्षा का अलर्ट नहीं है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित अधिकांश शहरों में दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही रहेगी, हालांकि स्थानीय बादलों से कुछ स्थानों पर छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं।
- शुक्रवार को 4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: 11-12 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के शुरुआती प्रभाव से शुक्रवार को पूर्वी हिस्से के उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी जिलों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
- 13 सितंबर से पश्चिमी हिस्से में असर: मौसम विभाग के अनुसार, 13 सितंबर से बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जिसका सबसे तीव्र प्रभाव पश्चिमी मध्य प्रदेश (मालवा-निमाड़ और मध्य क्षेत्र) में झमाझम बारिश के रूप में देखने को मिलेगा।
सामान्य से 7% पीछे चल रहा मानसून: जून-अगस्त की कमी अब तक बरकरार
सितंबर के शुरुआती दिनों में हुई तेज बारिश के बावजूद राज्य में सीजनल बारिश का कुल आंकड़ा अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मानसूनी ब्रेक और अनियमित शुरुआत के कारण प्रदेश के कई संभागों में पानी की दरकार बनी हुई है।
- कोटे से 7% कम बारिश: वर्तमान मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में दर्ज की गई कुल वर्षा सामान्य औसत से 7 प्रतिशत कम बनी हुई है।
- जून से अगस्त तक 14% की कमी: मानसून के शुरुआती तीन महीनों (जून से अगस्त) के दौरान प्रदेश में निर्धारित कोटे से 14 प्रतिशत कम पानी बरसा था। हालांकि सितंबर के पहले हफ्ते की झड़ी ने इस अंतर को कुछ हद तक कम किया है, फिर भी कुल घाटा पूरी तरह पट नहीं पाया है।
- क्षेत्रीय विषमता: बुंदेलखंड और विंध्य के कुछ जिलों में जहां बाढ़ जैसे हालात बने, वहीं पश्चिमी और मध्य मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में फसल पकने के इस महत्वपूर्ण दौर में और अधिक पानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
भोपाल में सितंबर की बारिश का रिकॉर्ड: 5 साल से कोटे से ज्यादा बरस रहा पानी
राजधानी भोपाल में सितंबर माह की वर्षा का मिजाज प्रदेश के औसत से बिल्कुल अलग रहा है। शहर में मानसूनी ब्रेक के बावजूद सितंबर महीने में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है।
- 5 साल से औसत से अधिक बारिश: भोपाल में सितंबर माह का सामान्य वर्षा कोटा लगभग 7 इंच होता है, लेकिन पिछले 5 वर्षों से लगातार इस महीने कोटे से अधिक पानी बरस रहा है।
- रिकॉर्ड तोड़ वर्षा से लबालब हुए जलाशय: सितंबर के शुरुआती दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं, जिससे बड़ा तालाब, भदभदा, कलियासोत और केरवा डैम के गेट खोलने पड़े और शहर के सभी प्रमुख जलस्रोत अपनी पूर्ण भराव क्षमता तक पहुंच चुके हैं।
सितंबर के मध्य में मानसून का यह तीन दिवसीय विराम खरीफ फसलों—विशेषकर सोयाबीन, उड़द, मक्का और दलहन—के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। लगातार जलभराव के बाद तेज धूप खिलने से फसलों में लगने वाले फंगस, कीट और जड़ सड़न की समस्याओं में कमी आएगी तथा किसानों को कीटनाशक व उर्वरक छिड़काव का पर्याप्त समय मिल सकेगा। अब कृषि वैज्ञानिकों और किसानों की नजरें 13 सितंबर से सक्रिय होने वाले नए सिस्टम पर टिकी हैं, जो विदाई से पहले प्रदेश के 7 प्रतिशत मानसूनी घाटे को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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