देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के ग्रामीण अंचल में संदिग्ध परिस्थितियों में 20 दिनों के भीतर 13 ग्रामीणों की असामयिक मौत से पूरे क्षेत्र में सनसनी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में एक के बाद एक हुई इन मौतों के बाद अवैध और मिलावटी शराब का नेटवर्क फिर बहस के केंद्र में आ गया है। पीड़ित परिजनों और ग्रामीणों का खुला आरोप है कि इन सभी लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है, जिससे कई लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने और अस्पताल में भर्ती होने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन और आबकारी विभाग ने जहरीली शराब से मौत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से अत्यधिक शराब सेवन के चलते 'मल्टीपल ऑर्गन फेलियर' (Multiple Organ Failure) को कारण करार दिया है।

चंदाना-बिंजाना में दहशत: 4 दोस्तों की एक साथ मौत, ‘डायरी सिस्टम’ से सप्लाई का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार गांव में लंबे समय से अवैध शराब की समानांतर खेप उतारी जा रही थी, जिसकी परिणति इस त्रासदी के रूप में सामने आई:

  • चार दोस्तों की एक साथ मौत: स्थानीय लोगों का कहना है कि 15 अक्टूबर को चंदाना गांव में चार दोस्तों—दीपक, जितेंद्र, ओमप्रकाश और भीमा ने साथ बैठकर शराब पी थी। इसके अगले ही दिन चारों की तबीयत बिगड़ी और एक-एक कर चारों की जान चली गई।

  • आंखों की रोशनी जाने के दावे: परिजनों का आरोप है कि जहरीली शराब के दुष्प्रभाव से कई अन्य लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है और वे गंभीर हालत में विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।

  • 'डायरी सिस्टम' और फरार सप्लायर: ग्रामीणों ने खुलासा किया कि इलाके में अवैध शराब 'डायरी सिस्टम' (खाता बनाकर उधारी व नियमित आपूर्ति) के जरिए बेची जा रही थी। ग्रामीण चंदाना निवासी विंदू जायसवाल और विष्णु जायसवाल से शराब खरीदते थे, जो मौतों की खबर फैलते ही इलाके से फरार बताए जा रहे हैं।

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प्रशासनिक और आबकारी पक्ष: जहरीली शराब की बात से इनकार, रिपोर्ट का हवाला

मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासनिक और आबकारी अमला बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है:

  • दावों को बताया भ्रामक: देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह और एसडीएम अभिषेक शर्मा ने स्पष्ट किया कि मौतों का कारण जहरीली शराब नहीं है और प्राथमिक जांच में ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं।

  • जब्त शराब में टॉक्सिन नहीं: आबकारी कमिश्नर दीपक सक्सेना के अनुसार, शुरुआती जांच में संबंधित क्षेत्र से जब्त की गई शराब के नमूनों में कोई जहरीला तत्व (मिथाइल अल्कोहल आदि) नहीं पाया गया है।

  • मल्टीपल ऑर्गन फेलियर: प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक शराब पीने (Heavy Alcohol Consumption) के कारण शरीर के मुख्य अंगों के फेल होने से मौत की पुष्टि हुई है।

तीन महीने में मध्य प्रदेश से जुड़ा तीसरा बड़ा मामला: सवालों के घेरे में आबकारी विभाग

देवास में 13 मौतों का यह मामला ऐसे समय आया है जब राज्य पहले ही अवैध शराब के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है:

  • अगस्त 2026 (भावनगर कनेक्शन): अगस्त माह में गुजरात के भावनगर में 13 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई थीं, जिनकी आपूर्ति और नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश से जुड़े पाए गए थे।

  • सितंबर 2026 (सागर त्रासदी): सितंबर में सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्रों में संदिग्ध परिस्थितियों में 20 से अधिक लोगों की अकाल मौत हुई थी, जिससे आबकारी तंत्र पर भारी सवाल उठे थे।

  • अक्टूबर 2026 (देवास मामला): अब देवास में 20 दिनों के भीतर 13 मौतों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब के सिंडिकेट पर स्थानीय पुलिस और आबकारी अमले का नियंत्रण बेहद लचर है।

प्रशासनिक दावों और 'ऑर्गन फेलियर' की दलीलों के बावजूद, महज 20 दिनों में दो पड़ोसी गांवों के 13 लोगों का जान गंवाना और संदिग्ध शराब सप्लायरों का रातों-रात फरार हो जाना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। सागर के बाद अब देवास की इस घटना ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों में अवैध भट्टियों, अनधिकृत पैटियों और गैर-कानूनी वितरण तंत्र पर जब तक शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) के साथ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे संदिग्ध हादसों और पीड़ित परिवारों के आक्रोश पर पूर्ण विराम लगाना संभव नहीं होगा।