भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस महकमे के नए मुखिया (DGP) की ताजपोशी को लेकर प्रशासनिक और विधिक स्तर पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वर्तमान पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना का कार्यकाल आगामी 30 नवंबर 2026 को पूर्ण हो रहा है। उनकी सेवानिवृत्ति से पूर्व राज्य के नए पुलिस कप्तान के चयन के लिए मध्य प्रदेश शासन ने 12 वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दी है। यूपीएससी द्वारा नवंबर के पहले सप्ताह में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर तीन अधिकारियों का अंतिम पैनल तैयार किए जाने की संभावना है। यदि वरिष्ठता और योग्यता के समीकरण अनुकूल रहे, तो मध्य प्रदेश को अपने प्रशासनिक इतिहास में पहली महिला डीजीपी मिलने की प्रबल संभावना भी जताई जा रही है।
पहली महिला DGP बनने की दौड़ में प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, वरुण कपूर और उपेंद्र जैन भी प्रमुख दावेदार
राज्य सरकार द्वारा भेजे गए 12 नामों में 1991 बैच के तीन वरिष्ठतम अधिकारी सबसे आगे माने जा रहे हैं:
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आईपीएस प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (1991 बैच): वर्तमान में महानिदेशक (DG), होमगार्ड के पद पर पदस्थ प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। यदि राज्य सरकार यूपीएससी के पैनल में से उनके नाम पर मुहर लगाती है, तो वे मध्य प्रदेश पुलिस के 68 वर्षों के इतिहास में पहली महिला पुलिस महानिदेशक बनने का नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
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आईपीएस वरुण कपूर (1991 बैच): वर्तमान में महानिदेशक (DG), जेल विभाग का दायित्व संभाल रहे वरुण कपूर साइबर सुरक्षा और पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
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आईपीएस उपेंद्र जैन (1991 बैच): आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के महानिदेशक के रूप में संवेदनशील वित्तीय और भ्रष्टाचार निरोधक जांचों की कमान संभाल रहे उपेंद्र जैन भी वरिष्ठता और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के आधार पर पैनल की दौड़ में शामिल हैं।
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UPSC को भेजे गए 12 वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल
राज्य शासन द्वारा गृह मंत्रालय और यूपीएससी को प्रेषित 12 वरिष्ठ अधिकारियों की सूची में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रभागों के प्रमुख शामिल हैं:
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प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (DG, होमगार्ड)
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वरुण कपूर (DG, जेल)
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उपेंद्र जैन (DG, ईओडब्ल्यू)
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पंकज श्रीवास्तव
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आदर्श कटियार
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जी. अखेतो सेमा
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अनिल कुमार
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रवि गुप्ता
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आनंद कुमार सिंह
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मनमीत सिंह नारंग
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राजाबाबू सिंह
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डी.पी. गुप्ता
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और चयन की विधिक प्रक्रिया
राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक पुलिस सुधार निर्देशों (प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामला) के तहत पूरी तरह पारदर्शी और तय मानकों के अधीन होती है:
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योग्यता और सेवा अभिलेख: यूपीएससी की इम्पेनलमेंट कमेटी अधिकारियों के पिछले वर्षों के गोपनीय चरित्र पंजिका (ACR), सेवा रिकॉर्ड, सतर्कता क्लीयरेंस (Vigilance Clearance) और फील्ड पुलिसिंग के अनुभव का गहन मूल्यांकन करती है।
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तीन नामों का पैनल: संघ लोक सेवा आयोग सभी 12 अधिकारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद वरिष्ठता और उपयुक्तता के आधार पर केवल 3 पात्र अधिकारियों का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को वापस भेजता है।
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राज्य सरकार का अंतिम विशेषाधिकार: यूपीएससी द्वारा अनुशंसित 3 नामों के पैनल में से किसी एक अधिकारी को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्त करने का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और राज्य कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र में होता है।
कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, औद्योगिक निवेश के सुरक्षित वातावरण और आगामी 'सिंहस्थ-2028' जैसी विशाल चुनौतियों के दृष्टिगत मध्य प्रदेश के नए पुलिस मुखिया की भूमिका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होगी। नवंबर के प्रथम सप्ताह में होने वाली यूपीएससी की बैठक के बाद जैसे ही तीन नामों की अंतिम सूची सामने आएगी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य के प्रशासनिक ढांचे और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर प्रदेश के नए पुलिस कप्तान के नाम का अंतिम ऐलान करेंगे।
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