भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए सरकारी खरीदी में नियमों की धज्जियां उड़ाने और वित्तीय अनियमितताएं बरतने वाले तंत्र पर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक शिकंजा कस दिया है। टेंडर प्रक्रियाओं में हेरफेर, मनमाने रेट और चहेते सप्लायर्स को उपकृत करने के मामलों की विस्तृत जांच के बाद शासन ने करीब 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की है। इस कार्रवाई के दायरे में प्रदेशभर के लगभग 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) आए हैं। गंभीर वित्तीय कदाचार और शासन को राजस्व क्षति पहुंचाने के पुख्ता प्रमाण मिलने पर 7 वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि दोषियों से करीब ₹3 से ₹4 करोड़ की वित्तीय वसूली भी की जा चुकी है।
135 CMO जांच के दायरे में, 7 अधिकारियों की सरकारी सेवा समाप्त
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा की गई सघन ऑडिट व जांच में सामने आया कि GeM पोर्टल पर अनिवार्य प्रतिस्पर्धा और नियमों को दरकिनार कर चहेती फर्मों को मनमाने दामों पर खरीद आदेश बांटे गए थे:
- 392 कर्मचारियों पर कार्रवाई: प्रदेश की नगर परिषदों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों के 392 अधिकारियों व कर्मचारियों को विभागीय जांच, वेतन वृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि और निलंबन जैसी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है।
- 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारियों पर गाज: प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए करीब 135 वर्तमान और तत्कालीन सीएमओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, जो निकाय स्तर पर वित्तीय नियंत्रण के सर्वोच्च पद पर आसीन थे।
- सेवा से बर्खास्तगी और वसूली: घोर लापरवाही और आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकारी धन का गबन करने वाले 7 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त (Dismissed from Service) कर दिया गया है। इसके साथ ही गड़बड़ियों के जरिए निकायों को हुए नुकसान की भरपाई करते हुए लगभग ₹3 से ₹4 करोड़ की प्रत्यक्ष वित्तीय वसूली की जा चुकी है।
ठेकेदारों और वेंडर्स के सिंडिकेट पर चोट: 80 से अधिक सप्लायर्स पर कार्रवाई
सरकारी खरीदी में गड़बड़ी केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि स्थानीय निकायों में काम कर रहे सप्लायर्स और ठेकेदारों की मिलीभगत से समानांतर सिंडिकेट चलाया जा रहा था:
- 80 से अधिक ठेकेदारों पर शिकंजा: नियमों का उल्लंघन करने, घटिया सामग्री की आपूर्ति करने और फर्जी बिलिंग में संलिप्त पाए गए 80 से अधिक ठेकेदारों एवं आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
- ब्लैकलिस्टिंग और पोर्टल से बाहर का रास्ता: कई फर्मों को सरकारी कामकाज से काली सूची (Blacklist) में डालने और GeM पोर्टल से प्रतिबंधित कराने की विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि भविष्य में ये वेंडर्स किसी अन्य सरकारी महकमे में बोली न लगा सकें।
AI और डिजिटल निगरानी: पोर्टल पर गड़बड़ी होते ही जनरेट होगा रेड फ्लैग
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के साथ-साथ शासन अब खरीद प्रक्रिया में व्यवस्थागत सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी: नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का उपयोग केवल आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए है। किसी भी स्तर पर वित्तीय कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- ऑटोमेटेड एल्गोरिदम से पकड़: GeM पोर्टल पर होने वाले प्रत्येक लेनदेन, निविदा की शर्तों और बाजार भाव के विश्लेषण के लिए डिजिटल टूल्स के साथ एआई एल्गोरिदम तैनात किए जा रहे हैं। यदि किसी उत्पाद की दरें बाजार से अस्वाभाविक रूप से अधिक होंगी या बिडिंग शर्तों में किसी खास वेंडर को लाभ पहुंचाने के लिए फेरबदल किया जाएगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट (Red Flag) जारी कर देगा।
- जवाबदेह वर्कफ्लो: डिजिटल ऑडिट ट्रेल के माध्यम से हर फाइल और भुगतान की इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग की जा रही है, जिससे संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 392 अधिकारियों-कर्मचारियों और 80 से अधिक ठेकेदारों पर हुई यह व्यापक कार्रवाई राज्य के प्रशासनिक महकमे में एक स्पष्ट चेतावनी है कि डिजिटल खरीद मंचों की आड़ में वित्तीय मनमानी का दौर अब समाप्त हो चुका है। सात अधिकारियों की बर्खास्तगी और करोड़ों रुपये की वसूली यह रेखांकित करती है कि सरकार केवल कागजी जांच तक सीमित न रहकर सख्त कानूनी नतीजे देने के मूड में है। एआई आधारित पारदर्शी निगरानी प्रणाली के लागू होने से आने वाले समय में नगरीय निकायों के बजट का शत-प्रतिशत सदुपयोग और सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
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