उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, देश के पूर्व गृह मंत्री और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 'भारत रत्न' पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती के अवसर पर राजधानी लखनऊ में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित पंडित पंत की प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर उनकी पावन प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन में दिए गए ऐतिहासिक योगदान, रियासतों के एकीकरण के दौर में उनकी दृढ़ प्रशासनिक कुशलता तथा नवगठित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव रखने में उनके विजन को कृतज्ञतापूर्वक याद किया।
सुशासन के उच्च आदर्श और सामाजिक-आर्थिक उन्नयन का संकल्प
पुष्पांजलि अर्पित करने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के जीवन दर्शन और उनकी प्रशासनिक नीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की शासन-व्यवस्था को संवेदनशील, लोक-कल्याणकारी और विकासोन्मुख बनाने में पंत जी की नीतियां आज भी मार्गदर्शक हैं।
- सुशासन की मजबूत आधारशिला: पंडित पंत ने आजादी के बाद उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक शुचिता, जवाबदेही और कानून के राज के जो मानक स्थापित किए, वे आज भी शासन-प्रशासन के लिए अनुकरणीय हैं।
- सामाजिक-आर्थिक बदलाव के प्रणेता: उन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद राज्य में कृषि सुधारों, जमींदारी उन्मूलन और ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक उत्थान के लिए युगांतरकारी कदम उठाए, जिससे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को स्वावलंबन का मार्ग मिला।
- राष्ट्रहित सर्वोपरि: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पंडित पंत ने व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर सदैव राष्ट्र की एकता, अखंडता और सार्वभौमिक प्रगति को प्राथमिकता दी।
गृह मंत्री के रूप में दृढ़ नेतृत्व और हिंदी भाषा के प्रति अनन्य अनुराग
मुख्यमंत्री ने देश के गृह मंत्री के रूप में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के ऐतिहासिक कार्यकाल का विशेष रूप से स्मरण किया। सरदार वल्लभभाई पटेल के बाद देश के गृह मंत्री का पद संभालने वाले पंडित पंत ने भारत के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और राज्यों के पुनर्गठन को शांतिपूर्ण ढंग से अमलीजामा पहनाने में असाधारण कौशल दिखाया था।
- राजभाषा हिंदी को संवैधानिक सम्मान: पंडित पंत हिंदी भाषा के अनन्य समर्थक और संरक्षक थे। उन्होंने आधिकारिक कामकाज और राष्ट्रीय विमर्श में हिंदी को उसका स्वाभाविक स्थान दिलाने के लिए संविधान सभा से लेकर संसद तक सतत प्रयास किए।
- लोकतांत्रिक मूल्यों के सजग प्रहरी: एक प्रखर विधिवेत्ता और ओजस्वी वक्ता के रूप में उन्होंने संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को समृद्ध करने में अमूल्य योगदान दिया।
- भारतीय लोकतंत्र की अमूल्य विरासत: सीएम योगी ने रेखांकित किया कि उनका दूरदर्शी नेतृत्व और समाज कल्याण के प्रति निष्काम समर्पण भारतीय लोकतंत्र की वह पूंजी है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सदैव राष्ट्रसेवा की प्रेरणा प्राप्त करती रहेंगी।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री द्वारा अर्पित यह श्रद्धांजलि केवल एक औपचारिक नमन नहीं, बल्कि उस मूल्य-आधारित राजनीति और जनहितैषी प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता का दोहराव है, जिसकी नींव पंडित जी ने रखी थी। उत्तर प्रदेश को आज देश के सबसे तेज गति से बढ़ते और सशक्त राज्य के रूप में विकसित करने का जो संकल्प लिया गया है, उसकी आत्मा में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के अंत्योदय, आत्मनिर्भरता और समावेशी सुशासन के वही बुनियादी सिद्धांत निहित हैं।
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