भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के विमानन व्यय (Aviation Bill) में पिछले पांच वर्षों के दौरान अप्रत्याशित और भारी उछाल दर्ज किया गया है। राज्य विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक प्रतिवेदन और सदन में दिए गए उत्तरों के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन ने जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच निजी एविएशन कंपनियों से विमान एवं हेलीकॉप्टर किराए पर लेने पर कुल ₹290 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च की है। विधानसभा में पेश ब्योरे से सामने आया है कि वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दौरान सरकार किराए के विमानों और हेलीकॉप्टरों पर औसतन लगभग ₹21 लाख प्रतिदिन खर्च कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा सदन में स्वीकार किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 में जहां राज्य का वार्षिक विमान किराया व्यय मात्र ₹1.63 करोड़ था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर ₹90.7 करोड़ के ऐतिहासिक और सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
खर्च का तुलनात्मक गणित: 23 महीनों में ₹143 करोड़ का भुगतान
विधानसभा पटल पर रखे गए दस्तावेजों के अनुसार, सरकार के विमानन खर्च में पिछले दो वर्षों के दौरान बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है:
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जनवरी 2024 से नवंबर 2025 (लगभग 23 महीने): इस अवधि में सरकार ने निजी ऑपरेटरों से विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर लेने के एवज में ₹143 करोड़ का भुगतान किया। इस व्यय का औसत निकालें तो यह लगभग ₹6.2 करोड़ प्रति माह अथवा औसतन ₹20 से ₹21 लाख प्रतिदिन बैठता है।
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जनवरी 2021 से दिसंबर 2023 (3 वर्ष / 36 महीने): इससे पूर्ववर्ती तीन वर्षों के दौरान शासन ने कुल ₹147 करोड़ खर्च किए थे। उस समय का औसत लगभग ₹4.1 करोड़ प्रति माह अथवा औसतन ₹13 से ₹14 लाख प्रतिदिन था।
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वर्ष 2025 में रिकॉर्ड भुगतान: केवल वर्ष 2025 में अब तक निजी चार्टर कंपनियों को ₹90.7 करोड़ दिए जा चुके हैं, जो राज्य के इतिहास में एक कैलेंडर वर्ष के दौरान किराए के विमानों पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा खर्च है।
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2023 में किराए की दरों में 30% तक की भारी वृद्धि: प्रति घंटा ₹5.70 लाख तक पहुंची दरें
सदन में प्रस्तुत विवरण से स्पष्ट हुआ है कि राज्य शासन ने वर्ष 2023 में विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर लेने की आधिकारिक दरों में तेज वृद्धि को स्वीकृति दी थी:
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वृद्धि के पीछे सरकार के तर्क: शासन ने दरों में बढ़ोतरी के लिए कोविड-19 महामारी के बाद देश-दुनिया में हवाई पर्यटन में उछाल, वीवीआईपी दौरों के लिए चार्टर्ड विमानों की बढ़ती मांग, वैश्विक विमानन आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, लोकसभा चुनाव की तैयारियां तथा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) और स्पेयर पार्ट्स के रख-रखाव खर्च में हुई तीव्र वृद्धि का हवाला दिया।
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प्रति घंटा दरों में उछाल:
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कैटेगरी-1 (विमान): वर्ष 2022-23 में जो दरें ₹4.45 लाख प्रति घंटा थीं, वे वर्ष 2024 में बढ़कर ₹5.70 लाख प्रति घंटा हो गईं।
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कैटेगरी-2 (विमान): यह दर ₹3.50 लाख प्रति घंटा से संशोधित होकर ₹4.75 लाख प्रति घंटा कर दी गई।
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हेलीकॉप्टर दरें: कतिपय श्रेणियों में रोटरक्राफ्ट/हेलीकॉप्टर का किराया बढ़कर ₹5.29 लाख प्रति घंटा तक पहुंच गया।
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खुद के बेड़े की लाचारी: 4 साल से ग्वालियर में खड़ा है क्रैश विमान, चालू हालत में सिर्फ एक हेलीकॉप्टर
विधायक पंकज उपाध्याय द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने अपने राजकीय विमानन बेड़े की जर्जर स्थिति को भी सार्वजनिक किया:
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कार्यशील फिक्स्ड-विंग विमान शून्य: मध्य प्रदेश सरकार के पास वर्तमान में अपना कोई भी कार्यशील स्थिर-पंख वाला (Fixed-Wing) विमान मौजूद नहीं है।
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एकमात्र हेलीकॉप्टर के भरोसे सरकार: पूरे राज्य के शासकीय बेड़े में इस समय केवल एक ही हेलीकॉप्टर चालू हालत में उपलब्ध है।
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ग्वालियर में 4 साल से कबाड़ पड़ा विमान: मई 2021 में रेमडेसिविर इंजेक्शन लाते समय ग्वालियर हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ सरकारी विमान पिछले चार वर्षों से अधिक समय से वहीं ग्राउंडेड खड़ा है। इतने वर्षों में न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही बीमा क्लेम व प्रतिस्थापन (Replacement) की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी।
विपक्ष के तेवर तल्ख: समय पर विमान प्रबंधन न होने से राजस्व को अरबों की चपत
सरकारी आंकड़ों के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और बेड़े के लचर प्रबंधन पर तीखे सवाल खड़े किए हैं:
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निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप: विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार ने अपने निष्क्रिय विमानों को ठीक कराने या समय रहते नया विमान खरीदने के बजाय निजी चार्टर ऑपरेटरों से महंगे दामों पर विमान किराए पर लेने को प्राथमिकता दी, जिससे सरकारी खजाने पर प्रतिदिन ₹21 लाख का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा।
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बेड़ा आधुनिकीकरण में देरी: विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यदि मई 2021 के हादसे के बाद शासन समयबद्ध तरीके से बेड़े का प्रबंधन करता, तो निजी कंपनियों को दिए गए ₹290 करोड़ के भारी-भरकम राजस्व की बचत की जा सकती थी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत यह रिपोर्ट उजागर करती है कि अपने विमानन संसाधनों के अभाव और मरम्मत प्रक्रियाओं में वर्षों की देरी के कारण राज्य सरकार को किस कदर निजी चार्टर ऑपरेटरों की ऊंची दरों पर निर्भर रहना पड़ा है। हालांकि हाल ही में ₹350 करोड़ के बॉम्बार्डियर चैलेंजर जेट और ₹225 करोड़ के एयरबस ACH160 हेलीकॉप्टर के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में किराए के मद में खर्च हुए ₹290 करोड़ का आंकड़ा प्रशासनिक वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के दूरदर्शी उपयोग पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।
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