रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता और जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। इन गिफ्ट पैक को वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने स्थानीय वनोपज और हर्बल उत्पादों से तैयार किया है। इसका उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध वन संपदा से तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाने के अवसर पैदा करना है। दिवाली के अवसर पर पेश किए गए ये गिफ्ट पैक दो श्रेणियों—प्रीमियम और सामान्य—में उपलब्ध होंगे। इनमें जामुन जूस, आंवला कैंडी, महुआ और कोदो से बनी कुकीज, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, जशपुर की ग्रीन टी और बस्तर के काजू जैसे उत्पाद शामिल हैं। ये पैक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित संजीवनी विक्रय केंद्रों पर मिलेंगे। इस पहल से स्थानीय उत्पादों की पहचान बढ़ाने के साथ महिला समूहों और वनांचल के परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया गिफ्ट पैक का लोकार्पण, स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण करते हुए इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में वनों से मिलने वाली उपज का प्रदेश के भीतर ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन करना जरूरी है, ताकि इसका सीधा लाभ स्थानीय संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री के अनुसार, वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से महिलाएं स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण करके गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने से उनके काम को नई पहचान मिल सकती है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लोग छत्तीसगढ़ में बने उत्पाद खरीदते हैं और उपहार के रूप में देते हैं, तो इससे प्रदेश के वनांचल में रहने वाले परिवारों तथा महिला समूहों को आर्थिक लाभ पहुंचता है।

यह पहल त्योहारों के दौरान उपहार खरीदने की परंपरा को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है। इससे उपभोक्ताओं को प्रदेश में तैयार उत्पाद उपलब्ध होंगे और स्थानीय उत्पादकों को अपने सामान की बिक्री बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

दो श्रेणियों में तैयार किए गए दिवाली गिफ्ट पैक, संजीवनी केंद्रों पर होगी बिक्री

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक को उपभोक्ताओं की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो श्रेणियों में तैयार किया गया है। इनमें प्रीमियम गिफ्ट पैक और सामान्य गिफ्ट पैक शामिल हैं।

गिफ्ट पैक की प्रमुख विशेषताएं:

• प्रीमियम गिफ्ट पैक: इसमें नौ प्रकार के चयनित उत्पाद शामिल किए गए हैं।

• सामान्य गिफ्ट पैक: इसमें पांच प्रकार के उत्पाद रखे गए हैं।

• बिक्री केंद्र: छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित संजीवनी विक्रय केंद्र।

• मुख्य उद्देश्य: स्थानीय वनोपज आधारित उत्पादों की बिक्री बढ़ाना और महिला समूहों को बाजार से जोड़ना।

इन गिफ्ट पैक को दिवाली पर परिवार, मित्रों, रिश्तेदारों और व्यावसायिक परिचितों को उपहार देने के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इनमें शामिल उत्पाद प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय स्तर पर विकसित प्रसंस्करण कौशल को प्रदर्शित करते हैं।

संजीवनी विक्रय केंद्रों के माध्यम से बिक्री की व्यवस्था होने से उपभोक्ता इन उत्पादों तक पहुंच सकेंगे। हालांकि, गिफ्ट पैक की कीमत, उपलब्ध स्टॉक और सभी केंद्रों पर उपलब्धता की जानकारी संबंधित विक्रय केंद्रों से प्राप्त की जा सकती है।

जामुन जूस से महुआ कुकीज तक, गिफ्ट पैक में छत्तीसगढ़ की वन संपदा का स्वाद

इन गिफ्ट पैक की खासियत इनमें शामिल स्थानीय और हर्बल उत्पाद हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मिलने वाली वनोपज और पारंपरिक खाद्य सामग्री को प्रसंस्करण के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदला गया है।

गिफ्ट पैक में शामिल प्रमुख उत्पादों में जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो और महुआ से बनी कुकीज, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी और एलोवेरा जेल शामिल हैं।

इन उत्पादों में खाद्य सामग्री के साथ हर्बल और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पाद भी शामिल हैं। इससे गिफ्ट पैक में विविधता आती है और उपभोक्ताओं को स्थानीय उत्पादों का एक साथ चयन करने का अवसर मिलता है।

प्रदेश की वन संपदा से तैयार उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग में प्रस्तुत करना इनके विपणन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करने वाले समूहों के सामने बाजार तक पहुंच, ब्रांड पहचान और उत्पादों की बिक्री बढ़ाने जैसी चुनौतियां होती हैं। ऐसे में सामूहिक ब्रांडिंग और बिक्री केंद्रों का नेटवर्क उनके उत्पादों को अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में सहायक हो सकता है।

यह पहल छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्वाद और प्राकृतिक संसाधनों को त्योहारों के उपहारों के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

कौरीनभाटा से डोंगानाला तक, कई वन धन विकास केंद्रों में तैयार हो रहे उत्पाद

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद प्रदेश के विभिन्न वन धन विकास केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पैकेजिंग का काम किया जा रहा है।

उत्पादन से जुड़े प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं:

• वन धन विकास केंद्र कौरीनभाटा, राजनांदगांव।

• वन धन विकास केंद्र बोड़ला, कवर्धा।

• वन धन विकास केंद्र पंचक्की, जशपुर।

• वन धन विकास केंद्र आसना, जगदलपुर।

• वन धन विकास केंद्र दुगली, धमतरी।

• वन धन विकास केंद्र डोंगानाला, कटघोरा।

• केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई, जामगांव एम, दुर्ग।

इन केंद्रों पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वनोपज को उपयोगी और बाजार में बिकने योग्य उत्पादों में बदलने का काम किया जा रहा है। इससे कच्चे वन उत्पादों की बिक्री के साथ-साथ प्रसंस्करण और पैकेजिंग के माध्यम से अतिरिक्त मूल्य तैयार करने की संभावना बढ़ती है।

इन इकाइयों में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। महिलाएं उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसे कार्यों से जुड़कर आय अर्जित करने के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

60 से 70 लाख रुपये सालाना कारोबार, महिला समूहों की आत्मनिर्भरता पर जोर

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन वन धन विकास केंद्रों और संबंधित प्रसंस्करण इकाइयों का सालाना कारोबार करीब 60 से 70 लाख रुपये है। इन केंद्रों में वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से स्थानीय स्तर पर आय और रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए ऐसी गतिविधियां केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं हैं। उत्पादन की योजना बनाने, गुणवत्ता बनाए रखने, पैकेजिंग करने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी से व्यावसायिक अनुभव भी विकसित होता है।

दिवाली जैसे बड़े त्योहार के अवसर पर गिफ्ट पैक की बिक्री स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाने का एक माध्यम बन सकती है। यदि उपभोक्ताओं के बीच इन उत्पादों की पहचान मजबूत होती है और बिक्री नियमित बनी रहती है, तो इसका लाभ उत्पादन से जुड़े समूहों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि, इस पहल के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए बिक्री के आंकड़ों, महिला समूहों की वास्तविक आय, उत्पादों की बाजार में मांग और नए रोजगार के अवसरों से संबंधित जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।

इस दिशा में बेहतर ब्रांडिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, नियमित आपूर्ति और बिक्री नेटवर्क का विस्तार स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

जरूरी बातें एक नजर में

• कार्यक्रम: छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण।

• लोकार्पणकर्ता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय।

• स्थान: मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन, रायपुर।

• गिफ्ट पैक की श्रेणियां: प्रीमियम और सामान्य।

• प्रीमियम पैक: नौ प्रकार के उत्पाद।

• सामान्य पैक: पांच प्रकार के उत्पाद।

• बिक्री का माध्यम: संजीवनी विक्रय केंद्र।

• प्रमुख उत्पाद: जामुन जूस, आंवला कैंडी, कोदो-महुआ कुकीज, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के काजू, जशपुर की ग्रीन टी और एलोवेरा जेल।

• उत्पादन केंद्र: राजनांदगांव, कवर्धा, जशपुर, जगदलपुर, धमतरी, कटघोरा और दुर्ग सहित विभिन्न स्थान।

• बताया गया सालाना कारोबार: करीब 60 से 70 लाख रुपये।

उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल, महिला समूहों और वनवासी परिवारों को मिल सकता है लाभ

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण प्रदेश की वन संपदा, स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमिता को एक मंच पर लाने की पहल है। वन धन विकास केंद्रों से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उपलब्ध कराने से उनकी पहचान बढ़ाने और बिक्री के नए अवसर विकसित करने की संभावना है।

इस पहल का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि छत्तीसगढ़ के अनेक वनवासी परिवारों की आजीविका लघु वनोपज पर निर्भर करती है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन बढ़ता है, तो उत्पादों की बाजार में उपयोगिता बढ़ सकती है और इससे जुड़े लोगों के लिए आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील भी इसी उद्देश्य से जुड़ी है। त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहन मिलने से महिला समूहों और वनांचल के परिवारों के उत्पादों को अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता नियमित बिक्री, उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य और उत्पादकों तक पहुंचने वाले आर्थिक लाभ पर निर्भर करेगी। यदि गिफ्ट पैक की मांग बढ़ती है और संजीवनी केंद्रों के माध्यम से बाजार का विस्तार होता है, तो यह मॉडल स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकता है।