ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से भारत के लिए बेहद गर्व की खबर आई है। स्टार भारोत्तोलक और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में भारत को इन खेलों का पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाया है।
31 वर्षीय मीराबाई ने स्नैच और 'क्लीन एंड जर्क' मिलाकर कुल 190 किलोग्राम वजन उठाया। उनकी यह जीत कितनी एकतरफा रही, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे स्थान पर रही नाइजीरिया की सिल्वर मेडलिस्ट से उन्होंने 22 किलोग्राम अधिक वजन उठाया।
- स्नैच राउंड: पहली कोशिश (82 kg) में असफल होने के बाद मीराबाई ने दूसरी कोशिश में उसे उठाया और तीसरी कोशिश में 85 किलोग्राम वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बना दिया।
- क्लीन एंड जर्क राउंड: पहली कोशिश के बाद संभलते हुए मीराबाई ने अपने दूसरे प्रयास में 105 किलोग्राम वजन आसानी से उठाकर भारत की झोली में पहला गोल्ड डाल दिया।
"चोटों और संघर्षों में परिवार ने दिया साथ; विजय सर ने बनाए रखा फोकस"
स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार के अटूट समर्थन और अपने लंबे समय के कोच विजय शर्मा के मार्गदर्शन को दिया:
"मेरे परिवार ने आज तक मेरा बहुत साथ दिया है। मुझे कई चोटें लगीं, लेकिन मेरे परिवार ने हर कदम पर मेरा समर्थन किया। शुरुआत से ही विजय सर ने हर छोटी-बड़ी चीज़ पर फोकस बनाए रखने में मेरी मदद की—चाहे वह गेम्स हों या कोई चैंपियनशिप कि हमें कैसा प्रदर्शन करना है। अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में लाना मेरे लिए सबसे कठिन रहा है, इसलिए यह प्रदर्शन मेरे लिए बहुत अहम है।"
— मीराबाई चानू
पोडियम पर जब भारत का राष्ट्रगान बजा, तो मीराबाई की आंखों से खुशी के आंसू झलक पड़े। उन्होंने कहा, "जब हमारा राष्ट्रगान बजा तो अपने आप आंसू निकल आए। ये खुशी के आंसू थे क्योंकि मैंने भारत के लिए पहला गोल्ड जीता।"
अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों ने भी माना चानू का लोहा
मीराबाई चानू के दबदबे को स्पर्धा की अन्य पदक विजेताओं ने भी खुले दिल से स्वीकार किया:
- सिल्वर मेडलिस्ट (रूथ असुकुओ न्योंग - नाइजीरिया): कुल 168 किग्रा (75 kg स्नैच + 93 kg C&J) वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल करने वाली रूथ ने कहा, "यह पदक जीतना आसान नहीं था। मैं अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा रखकर उतरी थी और मीराबाई चानू को गोल्ड जीतने पर बधाई देती हूं।"
- ब्रॉन्ज मेडलिस्ट (आइरीन हेनरी - मलेशिया): कुल 167 किग्रा (77 kg स्नैच + 90 kg C&J) उठाकर तीसरा स्थान पाने वाली आइरीन ने कहा, "यह पदक मेरे देश के लिए बहुत मायने रखता है। मैं पहले भी मीराबाई के खिलाफ खेल चुकी हूं, हम अच्छे दोस्त हैं और इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो भी करते हैं।"
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का स्वर्णिम रिकॉर्ड
यह लगातार चौथी बार है जब मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक जीता है। वे 2018 गोल्ड कोस्ट और 2022 बर्मिंघम के बाद अब 2026 ग्लासगो में लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय भारोत्तोलक बन गई हैं:
| राष्ट्रमंडल खेल | स्पर्धा / श्रेणी | पदक |
|---|---|---|
| ग्लासगो 2014 | 48 kg | रजत पदक (Silver) |
| गोल्ड कोस्ट 2018 | 48 kg | स्वर्ण पदक (Gold) |
| बर्मिंघम 2022 | 49 kg | स्वर्ण पदक (Gold) |
| ग्लासगो 2026 | 48 kg | स्वर्ण पदक (Gold) |
ग्लासगो 2026 में भारत का यह कुल दूसरा पदक है। इससे पहले पुरुषों की 60 किलोग्राम श्रेणी में ऋषिकांत सिंह ने भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था।
मीराबाई चानू की इस स्वर्णिम हैट्रिक ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चोटों, वजन घटाने की चुनौतियों और लंबे करियर के बावजूद यदि संकल्प मजबूत हो, तो वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराने से कोई नहीं रोक सकता। भारत के लिए उनका यह ऐतिहासिक स्वर्ण पदक आगामी स्पर्धाओं में पूरे भारतीय दल के उत्साह को कई गुना बढ़ाएगा।
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