दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की 1 नवंबर की महारैली के ठीक बाद भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में विशाल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करते हुए विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल जनसभा में हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शिरकत की। मंच से केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और कथित 'वोट चोरी' को लेकर लगाए गए आरोपों की धज्जियां उड़ाते हुए 13 करोड़ प्रभावित वोटों के पीछे का पूरा प्रशासनिक व तार्किक गणित सार्वजनिक किया। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना लोकतांत्रिक शुचिता का अभिन्न अंग है, न कि कोई राजनीतिक दुर्भावना।

13 करोड़ वोटों का गणित: शाह ने बिंदुवार समझाया विलोपन का आधार

राहुल गांधी के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कि एसआईआर के जरिए 13 करोड़ वैध मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं, गृह मंत्री ने आंकड़ों का विस्तृत वर्गीकरण प्रस्तुत किया:

  • 6 करोड़ स्थानांतरित नागरिक: गृह मंत्री ने कहा कि कुल आंकड़ों में से लगभग 6 करोड़ ऐसे लोग हैं जो रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से अपने मूल पते से किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो व्यक्ति संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में निवास ही नहीं कर रहा है, क्या उसका नाम वहां की मतदाता सूची में बने रहना चाहिए?
  • 3 करोड़ दिवंगत मतदाता: लगभग 3 करोड़ नाम ऐसे लोगों के हैं, जिनका देहांत हो चुका है। शाह ने दो टूक पूछा कि जो लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनका वोट कौन डालेगा और क्या ऐसे फर्जी मतदान की गुंजाइश को छोड़ देना चाहिए?
  • 1 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियां: करीब 1 करोड़ ऐसे मतदाताओं के नाम चिन्हित किए गए हैं, जिनकी एक से अधिक स्थानों पर प्रविष्टियां (Duplicate Entries) दर्ज थीं। निर्वाचन नियमों के तहत एक व्यक्ति का वोट केवल एक ही स्थान पर मान्य हो सकता है, लिहाजा अतिरिक्त नाम हटाना अनिवार्य है।
  • 3 करोड़ अवैध विदेशी व घुसपैठिए: लगभग 3 करोड़ नाम ऐसे पाए गए हैं जो भारतीय नागरिक नहीं हैं और देश में अवैध रूप से निवास कर रहे हैं।

‘घुसपैठियों के वोट बैंक की राजनीति कर रही कांग्रेस’: अवैध प्रविष्टियों पर कड़ा रुख

केंद्रीय गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं:

  • पहचान कर हटाएंगे नाम: अमित शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि जो देश के वैध नागरिक नहीं हैं, उन्हें भारत के भविष्य और लोकतांत्रिक सरकार के चुनाव का अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता। राहुल गांधी चाहे जितना विरोध कर लें, केंद्र सरकार और निर्वाचन तंत्र एक-एक घुसपैठिए की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची से बाहर करेगा।
  • चुनावी शुचिता से समझौता नहीं: उन्होंने कहा कि विपक्ष मृत और फर्जी नामों की आड़ में चुनावी धांधली का बचाव कर रहा है, जिसे भाजपा किसी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।

‘2014, 2019 या 2024 में कौन सा SIR था?’: शाह ने गिनाईं चुनावी जीतें

विपक्ष द्वारा भाजपा की चुनावी जीत को मतदाता सूची पुनरीक्षण से जोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली ऐतिहासिक विजयों का उल्लेख किया:

  • जनादेश पर सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी आदत: अमित शाह ने राहुल गांधी पर सीधा कटाक्ष करते हुए पूछा कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनी थी, तब देश में कौन सा एसआईआर लागू था?
  • लगातार जनादेश की ताकत: उन्होंने कहा कि 2019 के आम चुनाव, 2024 की ऐतिहासिक हैट्रिक और उसके उपरांत महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हुए चुनावों में जनता ने भाजपा की नीतियों और विकास पर अपनी मुहर लगाई है।
  • तेलंगाना में विजय का दावा: शाह ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि विपक्षी दुष्प्रचार के बावजूद जनता भाजपा के साथ है और आने वाले समय में पार्टी तेलंगाना में भी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है।

दिल्ली में विपक्ष के रामलीला मैदान प्रदर्शन के 24 घंटे के भीतर हैदराबाद से अमित शाह का यह आक्रामक पलटवार साफ दर्शाता है कि भाजपा मतदाता सूची पुनरीक्षण और नागरिकता सत्यापन के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने के बजाय इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता के बड़े विमर्श में बदल चुकी है। 13 करोड़ वोटों के वर्गीकरण को सार्वजनिक कर भाजपा ने विपक्षी गठबंधन के 'वोट चोरी' के आख्यान को सीधे तौर पर 'अवैध व फर्जी मतदाताओं के संरक्षण' के आरोप से घेर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होना तय है।