देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में 1 नवंबर 2026 को 71वें स्थापना दिवस की वर्षगांठ पूरे उल्लास और गरिमा के साथ मनाई जा रही है। राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड से लेकर आर्थिक राजधानी इंदौर के लता मंगेशकर सभागृह तक भव्य सांस्कृतिक संध्याओं, विकास प्रदर्शनियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के हितलाभ वितरण के विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया यह राज्य आज 71 वर्षों के उस ऐतिहासिक, संघर्षपूर्ण और रोमांचक सफर का साक्षी बन रहा है, जिसने चार अलग-अलग प्रशासनिक श्रेणियों और रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर एक विशाल भौगोलिक व सांस्कृतिक स्वरूप ग्रहण किया था।
स्थापना दिवस 2026: इंदौर और भोपाल में आयोजनों की रूपरेखा
प्रदेशभर के सभी जिला मुख्यालयों में स्थापना दिवस पर विशेष समारोह आयोजित किए जा रहे हैं:
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इंदौर में मुख्य समारोह: राजेंद्र नगर स्थित लता मंगेशकर सभागृह में प्रातः 10:30 बजे से जिला स्तरीय समारोह प्रारंभ हुआ। इसमें नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। समारोह में विभिन्न शासकीय विभागों की विकासात्मक प्रदर्शनियां लगाई गई हैं और पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत हितलाभ वितरित किए जा रहे हैं। शहर के सभी प्रमुख सरकारी भवनों को विशेष रोशनी से सजाया गया है।
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भोपाल में सुरक्षा व ट्रैफिक डायवर्जन: राजधानी के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक डायवर्जन प्लान लागू किया है। कार्यक्रम स्थल के आसपास बिना पास वाले वाहनों के लिए शाम 6 बजे से डायवर्जन प्रभावी रहेगा। नागरिकों की सुविधा के लिए ट्रैफिक हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और व्हाट्सएप हेल्पलाइन 7587602055 जारी की गई है।
चार हिस्सों को जोड़कर गढ़ा गया मध्य प्रदेश का भूगोल
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय वर्तमान मध्य प्रदेश का भूभाग चार भिन्न प्रशासनिक व्यवस्थाओं में विभाजित था:
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पार्ट 'ए' (सेंट्रल प्रोविंस एंड बरार): इसकी राजधानी नागपुर थी। इसमें वर्तमान महाकौशल, छत्तीसगढ़ और विदर्भ का मराठी भाषी इलाका शामिल था।
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पार्ट 'बी' (मध्य भारत): ग्वालियर और इंदौर की 25 रियासतों को मिलाकर बनाया गया राज्य, जिसकी 6 महीने शीतकालीन राजधानी ग्वालियर और 6 महीने ग्रीष्मकालीन राजधानी इंदौर हुआ करती थी।
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पार्ट 'सी' (विंध्य प्रदेश): बुंदेलखंड और बघेलखंड की 35 रियासतों को मिलाकर गठित, जिसकी राजधानी रीवा थी।
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भोपाल रियासत (पार्ट 'सी'): नवाब हमीदुल्लाह खान के अधीन एक स्वतंत्र रियासत, जिसका जनता के तीव्र आंदोलन और डॉ. शंकर दयाल शर्मा के नेतृत्व के उपरांत जून 1949 में भारत संघ में विधिवत विलय हुआ।
फजल अली आयोग, नेहरू का अचरज और प्रो. राव की रिपोर्ट
अक्टूबर 1953 में गठित न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता वाले 'राज्य पुनर्गठन आयोग' (जिसमें के.एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू सदस्य थे) के सामने इन विविध भूभागों को जोड़ने की जटिल चुनौती थी:
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विदर्भ का बॉम्बे में विलय: मराठी भाषी विदर्भ और नागपुर को तत्कालीन बॉम्बे (महाराष्ट्र) राज्य में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद महाकौशल, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर नए राज्य का खाका खींचा गया।
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पंडित नेहरू की शुरुआती प्रतिक्रिया: मध्य भारत के पहले मुख्यमंत्री लीलाधर जोशी के संस्मरणों के अनुसार, जब प्रस्तावित राज्य का नक्शा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो उन्होंने चौंकते हुए कहा था— ‘अरे! यह क्या अजूबा है? ऐसा लंबा-चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बन सकता है?’
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प्रो. वी.के.आर.वी. राव की आर्थिक रिपोर्ट: पंडित नेहरू की शंकाओं का समाधान करने के लिए राज्य के पक्षधर नेताओं ने प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. वी.के.आर.वी. राव से संपर्क किया। प्रो. राव ने एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक में ‘इकोनॉमिक वायबिलिटी ऑफ मध्यप्रदेश’ शीर्षक से विस्तृत विश्लेषणात्मक आलेख लिखा। इस रिपोर्ट के आधार पर नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार को आश्वस्त किया कि प्राकृतिक व वन संपदा से भरपूर यह राज्य आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर होगा।
राजधानी का पेच: जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर के दावों के बीच कैसे चुना गया भोपाल?
राज्य पुनर्गठन विधेयक तैयार होने के दौरान राजधानी के चयन को लेकर तीखी राजनीतिक खींचतान चली:
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जबलपुर की संस्तुति: राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में संस्कारधानी जबलपुर को राजधानी बनाने की औपचारिक सिफारिश की थी। दूसरी ओर ग्वालियर और इंदौर भी अपनी सशक्त प्रशासनिक पृष्ठभूमि के आधार पर प्रबल दावेदार थे।
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डॉ. शंकर दयाल शर्मा और सरदार पटेल की रणनीति: तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने भौगोलिक दृष्टि से राज्य के केंद्र में स्थित भोपाल को राजधानी बनाने का ठोस प्रस्ताव प्रधानमंत्री नेहरू के समक्ष रखा, जिसे मौलाना अबुल कलाम आजाद का भी पुरजोर समर्थन मिला।
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सामरिक व प्रशासनिक कारण: भोपाल में नवाब कालीन प्रशासनिक ढांचे, चौड़ी सड़कें और सरकारी कामकाज के लिए 'मिंटो हॉल' जैसी विशाल इमारतें पहले से मौजूद थीं। इसके अतिरिक्त, विलीनीकरण के दौर में नवाब-समर्थक व अलगाववादी तत्वों पर पूर्ण प्रशासनिक निगरानी रखने के रणनीतिक दृष्टिकोण से भी भोपाल को राजधानी बनाना उपयुक्त माना गया। जबलपुर को इस निर्णय के संतुलन स्वरूप मध्य प्रदेश का उच्च न्यायालय (High Court) प्रदान किया गया।
31 अक्टूबर 1956 की मध्यरात्रि: दीपावली, अमावस्या और 'जलते हुए हजारों दीये'
संसद में 11 सितंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित होने के बाद 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया:
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ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर के संस्मरणों के अनुसार, 31 अक्टूबर 1956 की मध्यरात्रि को मिंटो हॉल में शपथ समारोह आयोजित हुआ। संयोग से उस रात देश में दीपावली का पर्व था और आकाश में अमावस्या की सघन कालिमा थी।
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पं. रविशंकर शुक्ल का अमर कथन: जब किसी ने मंच पर याद दिलाया कि आज तो अमावस्या की रात है, तब पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रहे पंडित रविशंकर शुक्ल ने मुस्कुराते हुए ऐतिहासिक टिप्पणी की थी— ‘‘पर इस अंधेरे को मिटाने के लिए हजारों दीये तो जल रहे हैं।’’
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प्रथम संवैधानिक प्रमुख: मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्ला ने पहले राज्यपाल डॉ. भोगराजू पट्टाभि सीतारमैया को पद की शपथ दिलाई, जिसके बाद राज्यपाल ने पंडित रविशंकर शुक्ल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
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पहली विधानसभा सत्र (17 दिसंबर 1956): मिंटो हॉल में आयोजित पहले विधानसभा सत्र में 328 सदस्य सम्मिलित हुए (मध्यप्रांत से 150, मध्य भारत से 88, विंध्य प्रदेश से 60 और भोपाल से 30), जिनमें 12 महिला विधायक भी शामिल थीं।
छत्तीसगढ़ का विभाजन और 71 वर्षों का रूपांतरण
स्थापना के 44 वर्षों बाद, 1 नवंबर 2000 को प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के तहत छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ:
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विभाजन का प्रभाव: इस पुनर्गठन में मध्य प्रदेश ने अपना 30.4% भौगोलिक क्षेत्रफल, 26.62% जनसंख्या और 27.26% राजस्व छत्तीसगढ़ को सौंपा।
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आज का परिदृश्य: वर्तमान में मध्य प्रदेश 55 जिलों, 230 विधानसभा सीटों और 29 लोकसभा क्षेत्रों का सुदृढ़ राज्य है।
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बीमारू से विकसित राज्य की छलांग: कभी खाद्यान्न संकट और बुनियादी पिछड़ेपन से जूझने वाला यह राज्य आज देश का प्रमुख कृषि पावरहाउस है। शरबती गेहूं, सोयाबीन और दलहन में शीर्ष स्थान बनाए रखते हुए राज्य ने निरंतर 'कृषि कर्मण पुरस्कार' जीते हैं। वहीं राज्य की औद्योगिक राजधानी इंदौर लगातार कई वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बनकर विश्व पटल पर मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ा रही है।
71वें स्थापना दिवस पर मध्य प्रदेश का यह सिंहावलोकन दर्शाता है कि भौगोलिक विसंगतियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच जन्मा यह राज्य अपनी अटूट जनइच्छाशक्ति, विपुल प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक समरसता के बल पर आज देश के अग्रणी, आत्मनिर्भर और आधुनिक राज्यों की प्रथम पंक्ति में मजबूती से खड़ा है।
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