रायपुर। करोड़ों रुपये के बहुचर्चित 'महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप' मामले में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को संयुक्त अरब अमीरात/ओमान से प्रत्यर्पण (Extradition) के जरिए भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और प्रत्यर्पण की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से सार्वजनिक स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा है कि एजेंसियां यह साफ करें कि इस पूरे सट्टेबाजी सिंडिकेट का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है—सौरभ चंद्राकर या फिर खुद को ऐप का मालिक बताने वाला शुभम सोनी? इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे के ठीक आसपास इस कानूनी कार्रवाई के प्रचार को राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने का प्रयास करार दिया है।
भूपेश बघेल का केंद्रीय एजेंसियों पर हमला: ‘शुभम सोनी या सौरभ, असली मालिक कौन?’
पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कई बिंदु उठाए:
-
मास्टरमाइंड की पहचान पर सवाल: बघेल ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान शुभम सोनी नामक व्यक्ति का वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने खुद को महादेव ऐप का असली मालिक और सौरभ चंद्राकर सहित अन्य प्रमोटरों को अपना कर्मचारी बताया था। उन्होंने सवाल किया कि यदि शुभम सोनी मालिक था, तो अब सौरभ चंद्राकर को मुख्य सरगना क्यों बताया जा रहा है? जांच एजेंसियों को देश के सामने सिंडिकेट की वास्तविक संरचना स्पष्ट करनी चाहिए।
-
भाजपा कार्यालय से वीडियो जारी करने का आरोप: पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2023 के चुनावों से ठीक पहले शुभम सोनी का वीडियो भाजपा कार्यालय से जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य केवल कांग्रेस सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाना और चुनावी लाभ लेना था।
-
गिरफ्तारी नहीं, औपचारिक प्रत्यर्पण: बघेल ने दावा किया कि सौरभ चंद्राकर को भारतीय एजेंसियों ने किसी अचानक छापेमारी में नहीं पकड़ा, बल्कि वह पहले से ही ओमान में हिरासत/जेल में था। उसे राजनयिक और विधिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया के तहत भारत लाया गया है। इसे एजेंसियों द्वारा 'पकड़कर लाने' की उपलब्धि के रूप में पेश करना भ्रामक है।
-
पिछली सरकार की कार्रवाई का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में उनकी सरकार के दौरान ही महादेव ऐप के विरुद्ध राज्य में 72 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थीं और वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को औपचारिक पत्र लिखकर लुकआउट व रेड कॉर्नर सर्कुलर जारी करने की मांग की थी।
ओमान पुलिस की कार्रवाई और रेड कॉर्नर नोटिस: CBI-ED का शिकंजा
केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ विधिक घेराबंदी लंबे समय से जारी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है:
-
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस: सौरभ चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों और ईडी के एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांटेड था। इन सभी मामलों में आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल किए जा चुके थे।
-
रॉयल ओमान पुलिस द्वारा हिरासत: केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को ट्रैक कर हिरासत में लिया था। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय, सीबीआई और ईडी ने राजनयिक चैनलों के जरिए पुख्ता साक्ष्यों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था, जिसके बाद उसकी भारत रवानगी संभव हुई।
₹508 करोड़ की ‘प्रोटेक्शन मनी’ का चुनावी विवाद
महादेव सट्टेबाजी ऐप प्रकरण 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा था:
-
कूरियर असीम दास और शुभम सोनी के बयान: ईडी ने नवंबर 2023 में रायपुर से कूरियर असीम दास को भारी नकदी के साथ गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने दावा किया था कि असीम दास और विदेश में बैठे शुभम सोनी के बयानों से खुलासा हुआ है कि चुनावी खर्च और राजनीतिक संरक्षण के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक करीब ₹508 करोड़ की 'प्रोटेक्शन मनी' पहुंचाई जानी थी।
-
बघेल का खंडन: तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित, मनगढ़ंत और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था।
विदेशों से फ्रेंचाइजी नेटवर्क और म्यूल खातों का मकड़जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ देश के सबसे संगठित अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्कों में से एक रहा है:
-
अंतरराष्ट्रीय संचालन: यह प्लेटफॉर्म भारत के बाहर से संचालित होता था और देश के अलग-अलग राज्यों में फ्रेंचाइजी पैनलों, ब्रांचों और एजेंटों के जरिए इसका जाल फैलाया गया था।
-
क्रिकेट, फुटबॉल और कसीनो गेम्स पर सट्टा: यूजर्स को टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए जोड़कर उनसे क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और लाइव इवेंट्स पर सट्टा लगवाया जाता था।
-
म्यूल अकाउंट्स और हवाला नेटवर्क: सट्टेबाजी से जुटाई गई अवैध अरबों रुपये की धनराशि को पहले गरीब और अनजान लोगों के नाम पर खोले गए 'म्यूल' (Mule) बैंक खातों में घुमाया गया, कई स्तरों पर लेयरिंग की गई और फिर हवाला तथा शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजकर संपत्तियों में निवेश किया गया। इसका एक हिस्सा जांच से बचने के लिए अफसरों और रसूखदारों को रिश्वत के रूप में दिया जाता था।
EOW की एफआईआर और CBI को 71 मामलों की सुपुर्दगी
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इस मामले की जांच का दायरा और तेज कर दिया:
-
मार्च 2024 में EOW की एफआईआर: ईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया। इस एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ऐप प्रमोटर रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल अग्रवाल सहित 14 से अधिक लोगों को नामजद किया गया।
-
अगस्त 2024 में CBI जांच: प्रकरण की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए राज्य शासन ने अगस्त 2024 में विभिन्न थानों में दर्ज 70 स्थानीय पुलिस केस और ईओडब्ल्यू के एक मामले सहित कुल 71 मामलों की जांच औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंप दी।
सौरभ चंद्राकर के भारत प्रत्यर्पण के बाद जहां एक ओर केंद्रीय एजेंसियां सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन, नौकरशाहों और राजनेताओं को दिए गए कमीशन की कड़ियां जोड़ने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा शुभम सोनी की भूमिका और एजेंसियों की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों ने इस कानूनी मामले को एक बार फिर तीखे राजनीतिक टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया है। अदालत में चंद्राकर की रिमांड और आगामी पूछताछ से इस बहुचर्चित घोटाले में कई अन्य रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
Continue With Google
Comments (0)